The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Wednesday, Jun 10, 2026
Facebook X-twitter Youtube Linkedin
  • About Us
  • Contact Us
Subscribe
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Font ResizerAa
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & InnovationThe Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Search
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2026 The Industrial Empire. All Rights Reserved.
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ट्रेंडिंग खबरें > Russian oil: भारतीय रिफाइनरियों की रूसी तेल तक लगातार पहुँच, नए मध्यस्थों का उदय और बदलते वैश्विक समीकरण
ट्रेंडिंग खबरें

Russian oil: भारतीय रिफाइनरियों की रूसी तेल तक लगातार पहुँच, नए मध्यस्थों का उदय और बदलते वैश्विक समीकरण

Last updated: 10/12/2025 11:11 AM
By
Industrial Empire
Share
Indian refineries continue importing Russian oil through new intermediaries despite US sanctions
SHARE

Russian oil: अमेरिकी प्रतिबंधों की अंतिम तिथि 21 नवंबर गुजरने के बाद भी भारत की सरकारी और निजी रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखकर दुनिया को यह साफ संकेत दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी प्रतिबंध से ऊपर है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार पुरानी सप्लाई चेन के बजाय नए मध्यस्थ उभरकर सामने आए हैं, जो पश्चिम एशिया के जरिए भारतीय खरीदारों तक रूसी तेल पहुँचा रहे हैं। रिफाइनिंग क्षेत्र के सूत्रों और शिप ट्रैकिंग कंपनियों के डेटा से यह स्थिति और स्पष्ट हो जाती है।

केप्लर और वोर्टेक्सा जैसी मैरीटाइम इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा ट्रैक किए गए आंकड़ों में यह बात सामने आई कि प्रतिबंधों के बावजूद कुछ कार्गो अब भी रोसनेफ्ट – रूस की सबसे बड़ी और प्रतिबंधित सरकारी तेल कंपनी – से ही संबंधित थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि कारोबार के स्तर पर वैकल्पिक रास्ते लगातार बनते जा रहे हैं।

इसी कड़ी में कई नए आपूर्तिकर्ता तेजी से उभरे हैं। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा देखे गए डेटा के अनुसार अल्गाफ मैरीन, रेडवुड ग्लोबल सप्लाई, रसएक्सपोर्ट, रूसवियतपेट्रो, नेफ्टिसा, डक्कॉर, मोरएक्सपोर्ट, ग्रीवाले हब एफजेडई और ईस्ट इम्प्लेक्स स्ट्रीम एफजेडई जैसी कंपनियां अब भारतीय refiners को रूसी तेल बेचने वाले नए नाम बनकर सामने आई हैं। केप्लर के अधिकारियों का कहना है कि वे अपने निष्कर्ष शिपमेंट से जुड़े बिल ऑफ लाडिंग और दस्तावेजों पर आधारित जानकारी से तैयार करते हैं।

यूएई भी इस नई सप्लाई चेन का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। एनर्जी इंटेलिजेंस के मुताबिक प्राइमग्रोथ, ओरिक्स, ऑगस्टा, अमूर इन्वेस्टमेंट्स और नेक्सस (जिसे पहले तेजारिनेफ्ट के नाम से जाना जाता था) जैसे विक्रेता रूसी कच्चा तेल विभिन्न रिफाइनरियों को सप्लाई कर रहे हैं। भारतीय कंपनियों ने भी इस परिवर्तन की पुष्टि की है, जिससे संकेत मिलता है कि यह ट्रेंड अब बड़े पैमाने पर स्थापित हो चुका है।

रिफाइनरी क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इतने नए विक्रेताओं का उदय भारत और रूस के बीच तेल कारोबार में मौजूद लगभग 50 अरब डॉलर के विशाल आर्थिक महत्व को दर्शाता है। साथ ही, रूसी कच्चे तेल पर दी जाने वाली छूट 2023 के बाद से सबसे ऊँचे स्तर पर है और 2025 की शुरुआत में यह छूट लगभग तीन गुना तक बढ़ गई। इसके मुकाबले पश्चिमी एशिया और अमेरिका से विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी कीमतें कहीं अधिक हैं, जिसके कारण भारतीय खरीददार अभी भी रूसी तेल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

फिनिश ऊर्जा थिंक टैंक CREA की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के नए प्रतिबंधों का वास्तविक लक्ष्य भारतीय रिफाइनरियाँ हैं, जबकि दूसरी ओर यूरोपीय संघ और चीन प्रतिबंधों के बावजूद रूसी कमोडिटी के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं। CREA के अनुसार, इन दोनों क्षेत्रों ने कम कीमत वाले रूसी तेल और गैस से बड़ी बचत भी की है, जो अप्रत्यक्ष रूप से रूस के युद्ध प्रयत्नों को आर्थिक सहारा देती है।

रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने से लेकर 6 दिसंबर 2025 तक चीन ने तेल, गैस और कोयले के आयात पर रूस को 288 अरब यूरो का भुगतान किया। यूरोपीय संघ ने 217 अरब यूरो, भारत ने 161 अरब यूरो, और तुर्की ने 117 अरब यूरो चुकाए। यह आंकड़े बताते हैं कि युद्ध और प्रतिबंधों के बावजूद रूस की ऊर्जा आपूर्ति दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए अब भी अनिवार्य बनी हुई है।

केप्लर के शुरुआती दिसंबर के शिपमेंट डेटा से भी भारतीय निर्भरता का नया स्वरूप सामने आता है। रोसनेफ्ट द्वारा 21 नवंबर के बाद भेजे गए 25 जहाजों में से 16 भारतीय तटों पर पहुँचे। इनमें से छह रिलायंस इंडस्ट्रीज के जामनगर संयंत्र को और पाँच नायरा एनर्जी के वाडिनार रिफाइनरी को मिले। बाकी कार्गो भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों तक पहुँचे।

यह घटनाक्रम बताता है कि चाहे वैश्विक राजनीति कितनी भी उलझी क्यों न हो, भारत ऊर्जा सुरक्षा पर समझौता करने के मूड में नहीं है। और रूसी तेल की आपूर्ति – नई कंपनियों और वैकल्पिक रूट्स के जरिए आने वाले समय में भी इसी रणनीति का अहम हिस्सा बनी रह सकती है।

TAGGED:Crude Oil PricesFeaturedIndian refineriesIndustrial EmpireOil SanctionsPM ModiRussian OilRussian oil imports
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article STIM ब्रांड की सफलता की कहानी — 10,000 रुपये से 250 करोड़ तक का सफर, खुल्लर परिवार और विरेन खुल्लर की बिजनेस सफलता Success Story: 10,000 रुपये से 250 करोड़ तक: खुल्लर परिवार की STIM ने कैसे बदला भारत का डेंटल केयर मार्केट
Next Article Best home-based business ideas for earning money using smartphone and internet Business idea: घर बैठे कमाई के 5 आसान और भरोसेमंद तरीके, बिना डिग्री और बड़े निवेश के शुरू करें काम
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Might Also Like

PM Kisan 22nd installment date 13 March 2026 farmers payment direct bank transfer scheme India
एग्रीकल्चर

PM Kisan 22nd Installment: किसानों के लिए खुशखबरी, इस दिन खातों में आएगी अगली किस्त

By
Shashank Pathak
SpaceX का चांद पर इंसानी बस्ती बनाने का प्लान, चांद की सतह पर लैंडर और स्पेस स्टेशन का कॉन्सेप्ट
ऑटो/टेक

10 साल में चांद पर इंसानों की बस्ती? spacex का बड़ा प्लान, जानिए कितना आएगा खर्च

By
Industrial Empire
Budget 2026 में हर जिले में गर्ल हॉस्टल योजना का ऐलान करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
ट्रेंडिंग खबरें

Budget 2026: लड़कियों को बजट में मिला बड़ा तोहफा, हर जिले में बनेगा गर्ल्स हॉस्टल

By
Industrial empire correspondent
Airtel
टेलिकॉम

Airtel Africa का बड़ा दांव: मोबाइल मनी बिजनेस का IPO ला सकती है कंपनी, जुटा सकती है 2 अरब डॉलर तक

By
Industrial Empire
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Facebook X-twitter Youtube Linkedin

Quick links

  • About Us
  • Contact Us
Categories
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य

Policies

  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions

Copyright © 2025 The Industial Empire. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?