नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को जल्दबाजी में अंतिम रूप देने से बचना चाहिए। किसी भी ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसकी शर्तें देश के दीर्घकालिक आर्थिक और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हों।
अमेरिका के साथ ट्रेड वार्ता में अच्छी प्रगति
एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में संजीव सान्याल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है। हालांकि, अगर भारत के हितों की सुरक्षा के लिए आगे बातचीत की जरूरत पड़ती है या समझौते की कुछ शर्तों में बदलाव आवश्यक होता है, तो भारत को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।
सान्याल के मुताबिक, व्यापार समझौते सामान्य तौर पर लंबे समय तक प्रभावी रहते हैं। इसलिए किसी भी डील को जल्दबाजी में मंजूरी देना उचित नहीं है। एक बार समझौते की शर्तें तय हो जाने के बाद उनमें बदलाव करना आसान नहीं होता। ऐसे में सरकार को समझौते के हर पहलू का व्यापक मूल्यांकन करने के बाद ही अंतिम फैसला लेना चाहिए।
राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा जरूरी
सान्याल ने कहा कि अमेरिका के साथ मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, इन संबंधों को आगे बढ़ाने के दौरान भारत को अपने दीर्घकालिक हितों से समझौता नहीं करना चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर भारत को अतिरिक्त बातचीत के जरिए बेहतर शर्तें हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए। इसका उद्देश्य ऐसा व्यापार समझौता तैयार करना होना चाहिए, जिससे दोनों देशों को लाभ मिले और भारत के घरेलू आर्थिक हित भी सुरक्षित रहें।
कमजोर होती वैश्विक व्यापार व्यवस्था
वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर बात करते हुए सान्याल ने कहा कि मौजूदा समय में बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था कमजोर हुई है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौतों का महत्व बढ़ गया है।
भारत पहले ही ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते कर चुका है, जबकि यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता आगे बढ़ रही है। बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत के लिए विभिन्न देशों के साथ मजबूत आर्थिक और व्यापारिक संबंध बनाना महत्वपूर्ण है।
हालांकि, अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ भारत को अपने अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ भी संतुलन बनाए रखना होगा। इससे भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
कृषि और डेयरी क्षेत्र सबसे संवेदनशील
भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कृषि और डेयरी क्षेत्र सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों से जुड़े फैसलों का सीधा असर किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योगों पर पड़ सकता है। इसलिए इन क्षेत्रों में किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने से पहले भारतीय कृषि समुदाय के हितों की रक्षा करना जरूरी होगा।
सान्याल ने कहा कि कृषि और डेयरी से जुड़े मुद्दों पर घरेलू राजनीतिक सहमति की भी जरूरत हो सकती है। उन्होंने भारत-अमेरिका सिविल न्यूक्लियर डील का उदाहरण देते हुए बताया कि बड़े और रणनीतिक समझौतों को आगे बढ़ाने में व्यापक राजनीतिक समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत के लिए संतुलित समझौता अहम
भारत-अमेरिका ट्रेड डील दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, लेकिन इसके लिए भारत को जल्दबाजी के बजाय सावधानी से आगे बढ़ना होगा। व्यापार, कृषि, डेयरी, घरेलू उद्योग और दीर्घकालिक आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते की शर्तों का मूल्यांकन करना जरूरी होगा। संजीव सान्याल की टिप्पणी का मुख्य संदेश यही है कि अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों को आगे बढ़ाते हुए भारत को अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।