The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Sunday, Sep 13, 2026
Facebook X-twitter Youtube Linkedin
  • About Us
  • Contact Us
Subscribe
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Font ResizerAa
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & InnovationThe Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Search
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2026 The Industrial Empire. All Rights Reserved.
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ट्रेंडिंग खबरें > विदेशी निवेश रोकने के लिए सेबी के बड़े सुधार !
ट्रेंडिंग खबरें

विदेशी निवेश रोकने के लिए सेबी के बड़े सुधार !

Last updated: 20/08/2026 1:49 PM
By
Industrial Empire
Share
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए SEBI के प्रस्तावित सुधार
विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच SEBI भारतीय शेयर बाजार को अधिक आकर्षक बनाने के लिए कई सुधारों पर विचार कर रहा है।
SHARE

भारतीय शेयर बाजार में लगातार हो रही विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) बाजार के नियमों में कई बड़े बदलावों पर विचार कर रहा है। प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य भारतीय बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाना है। इनमें नकद बाजार में जमानत की जरूरत कम करना, शॉर्ट सेलिंग को आसान बनाना और लंबी अवधि के डेरिवेटिव कारोबार को बढ़ावा देना शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, सेबी उद्योग से सलाह लेने और बाजार से जुड़े संस्थानों को अपनी तकनीकी व्यवस्था बदलने के लिए समय देने के बाद करीब नौ महीने में इन सुधारों को लागू कर सकता है। हालांकि, शुरुआत में कुछ बदलावों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

विदेशी निवेशकों की बढ़ती निकासी

अक्टूबर 2024 से जून 2026 के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 50 अरब डॉलर से अधिक की पूंजी निकाली है। इसी अवधि में भारतीय शेयरों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 17 साल के निचले स्तर तक पहुंच गई। रुपये में भी इस साल करीब 6 फीसदी की गिरावट आई है।

वैश्विक MSCI Emerging Markets Index में भारत का भार सितंबर 2024 के करीब 21 फीसदी के उच्च स्तर से घटकर 12 फीसदी से नीचे आ गया है। प्रस्तावित सुधारों से भारत की वैश्विक सूचकांकों में स्थिति मजबूत होने और विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।

शॉर्ट सेलिंग और शेयर लेंडिंग पर जोर

सेबी सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार कर रहा है। इसके तहत उधार लेने और देने के लिए पात्र शेयरों की संख्या लगभग दोगुनी की जा सकती है। इससे नकद बाजार में शॉर्ट सेलिंग करना आसान होगा और निवेशकों को जोखिम प्रबंधन के अधिक विकल्प मिलेंगे।

विदेशी निवेशक लंबे समय से भारत के बाजार ढांचे को चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे प्रमुख एशियाई बाजारों के करीब लाने की मांग करते रहे हैं।

निवेशकों की पूंजी जरूरत घट सकती है

अत्यधिक तरल शेयरों में कारोबार के लिए जमानत की आवश्यकता कम करने का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण है। इससे निवेशकों की शुरुआती पूंजी आवश्यकता करीब 15 से 20 फीसदी तक घट सकती है।

एक साल से अधिक अवधि वाले डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए भी शुरुआती जमानत कम करने पर विचार किया जा रहा है। इससे लंबी अवधि की हेजिंग रणनीतियों को बढ़ावा मिल सकता है। फिलहाल भारतीय बाजार में साप्ताहिक और छोटी अवधि के डेरिवेटिव अनुबंधों में कारोबार काफी अधिक है, जबकि लंबी अवधि के अनुबंधों में तरलता सीमित है।

संस्थागत निवेश बढ़ाने की कोशिश

सेबी पिछले कुछ समय से छोटे निवेशकों की अत्यधिक डेरिवेटिव गतिविधियों को सीमित करने के उपाय कर रहा है। अब नियामक संस्थागत और पेशेवर निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबार की लागत और प्रक्रियागत बाधाएं कम होने से विदेशी संस्थागत निवेश तथा निष्क्रिय निवेश को भारत की ओर आकर्षित किया जा सकता है। हालांकि, केवल नियामकीय बदलाव विदेशी निवेश की वापसी की गारंटी नहीं देते। रुपये की स्थिति, कंपनियों का मूल्यांकन, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक बाजार की दिशा भी निवेशकों के फैसले में अहम भूमिका निभाएंगे।

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article SBI BSBD सेविंग्स अकाउंट के नए कैश निकासी नियम SBI BSBD अकाउंट के नियम बदले, 1 अक्टूबर से कैश निकासी पर लगेगा चार्ज
Next Article चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार ने स्टॉक सीमा घटाकर 15 दिन की चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार सख्त, स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन !
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Might Also Like

JioStar–ICC Media Rights Deal
ट्रेंडिंग खबरें

JioStar–ICC Media Rights Deal: 2027 तक बरकरार रहेगा समझौता, टी20 वर्ल्ड कप समेत सभी ICC टूर्नामेंट्स का प्रसारण तय

By
Industrial Empire
ट्रेंडिंग खबरें

भारत बनेगा ग्लोबल MRO हब, PM मोदी ने Sufran की हाई-टेक फैसिलिटी का किया उद्घाटन

By
Industrial Empire
अगस्त 2026 में FPIs का भारतीय शेयर बाजार के कंजम्पशन, ऑटो, हेल्थकेयर और आईटी सेक्टर में बढ़ा निवेश
टेलिकॉमट्रेंडिंग खबरेंबाज़ार

FPIs का कंजम्पशन सेक्टर पर बढ़ा भरोसा, टेलीकॉम और रियल्टी से घटाया निवेश

By
Industrial Empire
Gold and Silver Rate today at all-time high on MCX and international market
ट्रेंडिंग खबरें

Gold Silver Price Today: चांदी ₹4 लाख के पार, सोना ₹1.78 लाख के करीब, बाजार में मची हलचल

By
Industrial Empire
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Facebook X-twitter Youtube Linkedin

Quick links

  • About Us
  • Contact Us
Categories
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य

Policies

  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions

Copyright © 2025 The Industial Empire. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?