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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ऑटो/टेक > छोटी कारों की राह कठिन? CAFE-3 नियमों से बढ़ सकते हैं दाम
ऑटो/टेक

छोटी कारों की राह कठिन? CAFE-3 नियमों से बढ़ सकते हैं दाम

Last updated: 24/02/2026 3:33 PM
By
Industrial Empire
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CAFE-3 उत्सर्जन नियमों के कारण भारत में छोटी कारों की कीमत बढ़ने की संभावना
CAFE-3 नियम लागू होने पर छोटी कारें महंगी हो सकती हैं |
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भारत में किफायती कारों को लंबे समय से मध्यम वर्ग का सबसे भरोसेमंद परिवहन विकल्प माना जाता रहा है। लेकिन अब छोटी कार खरीदने का सपना महंगा पड़ सकता है। प्रस्तावित CAFE-3 (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) नियम लागू होने पर छोटी कारों की कीमतें लगभग 10% तक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऑटो उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नए उत्सर्जन और माइलेज मानकों को पूरा करना कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा, खासकर उन कंपनियों के लिए जो बड़े पैमाने पर एंट्री-लेवल कारें बनाती हैं।

Adira Magazine के विश्लेषण के अनुसार, सरकार का उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना और प्रदूषण घटाना है, लेकिन इसका सीधा असर किफायती कार सेगमेंट पर पड़ सकता है। अगर कंपनियों को नए नियमों के अनुरूप तकनीक लगानी पड़ी, तो उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका भार अंततः ग्राहकों पर ही आएगा। उद्योग जगत का कहना है कि कंपनियों के पास दो ही विकल्प होंगे—या तो महंगी फ्यूल-सेविंग तकनीक अपनाएं या फिर तय सीमा से अधिक उत्सर्जन पर जुर्माना भरें। दोनों ही स्थिति में छोटी कारों की कीमत बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

CAFE-3 क्या बदल सकता है?
CAFE यानी कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी ऐसे मानक हैं, जो तय करते हैं कि किसी वाहन निर्माता की सभी बेची गई कारों का औसत माइलेज कितना होना चाहिए और वे कितनी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित कर सकती हैं। CAFE-3 के प्रस्तावित ड्राफ्ट में छोटी कार बनाने वाली कंपनियों को अब तक मिलने वाली अतिरिक्त छूट समाप्त करने की बात सामने आई है। यह छूट खत्म होने से छोटी और सस्ती कारें बनाने का आर्थिक लाभ कम हो सकता है, जिससे कंपनियां बड़े या इलेक्ट्रिक मॉडलों पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं।

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड को बढ़ावा
नई नीति में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहन (REEV) को विशेष प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। इन वाहनों की बिक्री पर कंपनियों को अधिक ‘क्रेडिट’ मिलेगा, जबकि पारंपरिक पेट्रोल-डीजल (ICE) कारों पर कम अंक मिलेंगे। इससे कंपनियों के लिए इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारें बेचना ज्यादा फायदेमंद हो जाएगा। नतीजतन, बाजार में छोटी पेट्रोल-डीजल कारों की संख्या घट सकती है या उनकी कीमत बढ़ सकती है।

मध्यम वर्ग पर असर
छोटी कारें भारत में टू-व्हीलर से कार की ओर बढ़ने वाले उपभोक्ताओं का पहला कदम होती हैं। अगर इनकी कीमतें बढ़ती हैं, तो लाखों परिवारों के लिए कार खरीदना और मुश्किल हो सकता है। Adira Magazine मानता है कि पर्यावरणीय लक्ष्य जरूरी हैं, लेकिन नीति बनाते समय किफायती परिवहन विकल्पों को भी संतुलित रखना होगा। आने वाले महीनों में CAFE-3 का अंतिम स्वरूप तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि भारतीय कार बाजार किस दिशा में जाएगा—लेकिन संकेत यही हैं कि छोटी कारों का दौर पहले जैसा आसान नहीं रहेगा।

TAGGED:CAFECAFE-3Indian Auto IndustryIndustrial EmpireSmall Car India
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