कहते हैं कि असफलता ही सफलता की सबसे बड़ी सीख होती है। दिल्ली के दो दोस्तों मनीष भल्ला और अंकित लांबा की कहानी इसका उदाहरण है। एक कैफे बिजनेस बंद होने के बाद दोनों ने ऐसी समस्या का समाधान तलाशा, जिसका सामना आज कई ऑफिस जाने वाले लोग करते हैं। इसी सोच से जन्म हुआ हेल्दी फूड स्टार्टअप ‘ग्रीन गेन्स’ (Green Gains) का, जो वेंडिंग मशीन के जरिए महज 30 सेकंड में ताजा सलाद उपलब्ध कराता है।
फ्लॉप बिजनेस से मिला नए स्टार्टअप का आइडिया
मनीष और अंकित ने साल 2024 में कैफे बिजनेस के जरिए फूड इंडस्ट्री में कदम रखा था। हालांकि, उनका यह प्रयोग सफल नहीं हुआ और उन्हें कारोबार बंद करना पड़ा। इसके बाद दोनों ने अपनी जीवनशैली और खानपान पर ध्यान देना शुरू किया।
इस दौरान उन्हें महसूस हुआ कि ऑफिस में काम करने वाले लोगों के लिए जल्दी, साफ-सुथरा और पौष्टिक खाना ढूंढना आसान नहीं है। फूड डिलीवरी में इंतजार और हेल्दी विकल्पों की सीमित उपलब्धता ने उन्हें नया बिजनेस आइडिया दिया।
मार्च 2025 में दोनों दोस्तों ने अपनी बचत और परिवार की आर्थिक मदद से ग्रीन गेन्स की नींव रखी। उन्होंने वेंडिंग मशीनों, मेन्यू तैयार करने, ब्रांडिंग और किचन सेटअप पर निवेश किया।
कैसे काम करती है Green Gains की मशीन?
ग्रीन गेन्स का बिजनेस मॉडल काफी सरल है। ग्राहक मशीन की स्क्रीन पर अपनी पसंद का वेज या नॉन-वेज सलाद चुनते हैं और डिजिटल पेमेंट करते हैं। इसके बाद लगभग 30 सेकंड के भीतर उनका ऑर्डर मशीन से बाहर आ जाता है।
मशीनों में तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि सलाद को ताजा बनाए रखने में मदद मिल सके। मेन्यू में मेडिटेरियन चिकपी सलाद, ग्रीक क्विनोआ सलाद और तंदूरी चिकन सलाद जैसे विकल्प शामिल हैं। इनकी कीमत 179 से 269 रुपये के बीच बताई गई है।
गुरुग्राम के कॉर्पोरेट ऑफिस बने कारोबार का आधार
नवंबर 2025 में लॉन्च हुआ यह स्टार्टअप गुरुग्राम के कॉर्पोरेट इलाकों में अपनी जगह बना रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी DLF साइबर हब और DLF इन्फिनिटी टावर्स जैसे स्थानों पर सात वेंडिंग मशीनों के जरिए काम कर रही है।
स्टार्टअप अब तक 3,000 से ज्यादा अलग-अलग ग्राहकों तक पहुंच चुका है। इसकी करीब 50% रिपीट ग्राहक दर बताई गई है। फिलहाल कंपनी रोजाना लगभग 100 सलाद बेच रही है।
50 लाख रुपये के रेवेन्यू का लक्ष्य
ग्रीन गेन्स ने चालू वित्त वर्ष में 50 लाख रुपये का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। विस्तार योजना के तहत कंपनी 2026 के अंत तक आठ और मशीनें लगाने और 2027 तक 35 नई वेंडिंग मशीनें स्थापित करने की तैयारी में है। भविष्य में मेन्यू में योगर्ट बाउल जैसे विकल्प भी जोड़े जा सकते हैं।
इस बिजनेस की चुनौतियों में ग्राहकों का भरोसा जीतना, सही पैकेजिंग चुनना और मशीनों में खाद्य सुरक्षा बनाए रखना शामिल है। कंपनी सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों को अपनी प्रक्रियाओं और कोल्ड-चेन प्रबंधन के बारे में जानकारी दे रही है।
मनीष और अंकित की कहानी बताती है कि असफल बिजनेस के बाद भी नए अवसर तलाशे जा सकते हैं। सही समस्या की पहचान, ग्राहकों की जरूरतों को समझना और समय के साथ बिजनेस मॉडल बदलना किसी स्टार्टअप की आगे की राह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
नोट: कारोबार, बिक्री और विस्तार से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं।