भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सप्ताह के पहले दिन सोमवार, 2 नवंबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। सप्ताह की शुरुआत में ही सेंसेक्स और निफ्टी ने गैपअप ओपनिंग के साथ कारोबार शुरू किया। शुरुआती सत्र में बीएसई सेंसेक्स 75,450 के पार पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी ने भी 23,300 का स्तर पार कर लिया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को बड़ा फायदा हुआ और बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दोनों इंडेक्स में करीब एक-एक प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, इन शेयरों में तेजी का स्तर प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले थोड़ा सीमित रहा। बाजार में सकारात्मक माहौल के पीछे रिलायंस इंडस्ट्रीज के बेहतर तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी को अहम वजह माना जा रहा है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 6% से ज्यादा उछाल
सोमवार को बाजार की तेजी में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया। सितंबर तिमाही के अनुमान से बेहतर नतीजों के बाद कंपनी के शेयरों में 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। रिलायंस के शेयरों में खरीदारी का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया।
कंपनी के प्रदर्शन से एनर्जी इंडेक्स में भी 2.6 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा एनटीपीसी और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जैसे प्रमुख शेयरों में भी 2 से 3 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली। नतीजों के आधार पर शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती देने का काम किया।
निवेशकों की संपत्ति में 6.4 लाख करोड़ रुपये का इजाफा
शेयर बाजार में तेजी का सीधा फायदा निवेशकों की संपत्ति पर दिखाई दिया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 480.74 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे पहले 30 अक्टूबर को कारोबारी सत्र समाप्त होने के बाद यह आंकड़ा 474.37 लाख करोड़ रुपये था।
इस तरह एक कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों की संपत्ति में करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार में व्यापक खरीदारी और बड़े शेयरों में तेजी ने इस बढ़त में योगदान दिया।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कतर और ईरान के अधिकारियों के बीच लगातार तीसरे दिन बातचीत जारी रहने से भी बाजार की नजर कूटनीतिक घटनाक्रम पर बनी रही। निवेशक इस उम्मीद पर नजर रख रहे हैं कि बातचीत से क्षेत्रीय तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने का रास्ता निकल सकता है।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मजबूत हुआ सेंटीमेंट
घरेलू बाजार में तेजी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी से भी समर्थन मिला। उपलब्ध प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3,598 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार का माहौल बेहतर हुआ है। इसके साथ ही घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया।
निफ्टी के लिए 23,500 का स्तर अहम
बाजार की आगे की दिशा को लेकर HST वेल्थ के संस्थापक और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि तकनीकी नजरिए से निफ्टी का 23,000 के ऊपर पहुंचना रिकवरी का मजबूत संकेत है।
उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,175 से 23,285 के बीच का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस जोन है। यदि इंडेक्स 23,285 के ऊपर टिकता है, तो इसमें आगे 23,500 से 23,600 तक की तेजी देखने को मिल सकती है।
वहीं, बाजार में मुनाफावसूली होने पर 23,000 का स्तर पहला अहम सपोर्ट होगा। इसके नीचे 22,750 से 22,800 का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के बेहतर नतीजे, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार में तेजी का माहौल बनाया है। हालांकि, पश्चिम एशिया का तनाव और वैश्विक घटनाक्रम आगे भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।