नई दिल्ली: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Suzlon Energy के शेयरों में सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद भारी दबाव देखने को मिला है। कारोबारी सत्र के दौरान शेयर करीब 10 फीसदी तक टूट गया और 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। कंपनी के कमजोर EBITDA मार्जिन, उम्मीद से कम मुनाफे और कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं मिलने की चिंताओं ने निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया है। इसके अलावा ब्रोकरेज फर्मों की ओर से टारगेट प्राइस घटाए जाने से भी शेयर पर दबाव बढ़ा है।
सुजलॉन के शेयरों का प्रदर्शन साल 2026 में अब तक कमजोर रहा है। इस दौरान इसमें 35 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह शेयर मल्टीबैगर साबित हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इसने करीब 444 फीसदी का सकारात्मक रिटर्न दिया है।
नुवामा ने क्यों घटाया शेयर का टारगेट?
ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने सुजलॉन एनर्जी पर अपनी ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस 51 रुपये से घटाकर 41 रुपये कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की लंबी अवधि की कारोबारी योजनाएं आकर्षक हैं, लेकिन उनका वास्तविक फायदा आने वाले वर्षों में दिखाई देगा।
नुवामा ने वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 के लिए कंपनी के प्रति शेयर मुनाफे (EPS) के अनुमान में क्रमशः 9 फीसदी और 7 फीसदी की कटौती की है। बढ़ती लागत और कमजोर मार्जिन को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, मौजूदा शेयर भाव पर कंपनी का वैल्यूएशन FY29 की अनुमानित कमाई के करीब 18 गुना है।
तिमाही नतीजों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
सितंबर तिमाही में सुजलॉन ने 710 मेगावाट की परियोजनाओं का काम पूरा किया, जबकि नुवामा का अनुमान 690 मेगावाट था। इसके बावजूद कंपनी की आय करीब 4,880 करोड़ रुपये रही, जो ब्रोकरेज के 4,790 करोड़ रुपये के अनुमान से कुछ अधिक थी।
हालांकि, कंपनी का EBITDA मार्जिन अनुमानित 16.6 फीसदी के मुकाबले 14.8 फीसदी रहा। इसके चलते ऑपरेटिंग प्रॉफिट और नेट प्रॉफिट दोनों ब्रोकरेज के अनुमान से करीब 10 फीसदी कम रहे।
नुवामा के अनुसार, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से मार्जिन पर करीब 0.5 फीसदी अंक का असर पड़ा। वहीं, कंपनी की नई कारोबारी योजना ‘Suzlon 2.0’ से जुड़े एकमुश्त खर्चों ने मार्जिन को लगभग 1 फीसदी अंक और प्रभावित किया। कंपनी को उम्मीद है कि आगे EBITDA मार्जिन करीब 17 फीसदी पर स्थिर हो सकता है। हालांकि, FY27 के लिए उसने 15-16 फीसदी मार्जिन का अनुमान दिया है।
कैश फ्लो बना सबसे बड़ी चुनौती
सुजलॉन की बिक्री बढ़ रही है, लेकिन कारोबार से पर्याप्त नकदी पैदा नहीं हो रही है। सितंबर तिमाही में ग्राहकों से मिलने वाली बकाया रकम करीब 540 करोड़ रुपये बढ़ गई। वहीं, इन्वेंट्री में लगभग 950 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। इसके चलते कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो करीब 180 करोड़ रुपये निगेटिव रहा।
इसका मतलब है कि कंपनी के नियमित कारोबार से नकदी आने के बजाय ज्यादा रकम खर्च हुई। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी बकाया भुगतान की वसूली और इन्वेंट्री प्रबंधन में कितना सुधार कर पाती है।
Suzlon 2.0 से भविष्य में मिल सकती है मजबूती
कंपनी अब केवल विंड एनर्जी कारोबार तक सीमित नहीं रहना चाहती। Suzlon 2.0 योजना के तहत सोलर एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार की तैयारी है। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए 3-4 गीगावाट की असेंबली क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा कंपनी FY27 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहली टरबाइन डिलीवरी करने की तैयारी कर रही है। FY31 तक कंपनी ने सालाना औसतन 25 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ, 15 गीगावाट की ऑर्डर बुक और सालाना 10 गीगावाट की बिक्री का लक्ष्य रखा है।
कंपनी के सामने लंबी अवधि में विस्तार की संभावनाएं जरूर हैं, लेकिन फिलहाल कमजोर मार्जिन और नकदी प्रवाह की चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए आने वाली तिमाहियों के नतीजे और कंपनी की कारोबारी योजनाओं पर अमल महत्वपूर्ण रहेगा।