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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > बैंकिंग > विश्व बैंक ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 7.1% रहने की उम्मीद
बैंकिंग

विश्व बैंक ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 7.1% रहने की उम्मीद

Last updated: 06/10/2026 3:38 PM
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Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 7.1 फीसदी किया
विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के चलते भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया।
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भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर विश्व बैंक ने अपना आकलन पहले से बेहतर किया है। बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है। इससे पहले उसका अनुमान 6.6 फीसदी था। नए आकलन में मजबूत घरेलू मांग, उद्योग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख सहारा माना गया है।

यह अनुमान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसके बावजूद विश्व बैंक को भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखाई दे रही है।

घरेलू मांग बनी अर्थव्यवस्था की ताकत
विश्व बैंक के अनुसार भारत में घरेलू मांग की स्थिति मजबूत बनी हुई है। निजी खपत के साथ सरकारी खर्च और निवेश में भी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। उद्योग और सेवा क्षेत्र की बेहतर स्थिति ने भी आर्थिक वृद्धि को गति देने में योगदान दिया है।

इस अनुमान के साथ भारत की वृद्धि दर अब भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा अनुमान से भी ऊपर पहुंच गई है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं।

महंगी ऊर्जा सबसे बड़ी चुनौती
विश्व बैंक ने हालांकि ऊर्जा कीमतों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई है। पश्चिम एशिया में लंबे समय तक तनाव रहने की स्थिति में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसका असर परिवहन, उत्पादन और घरेलू खर्च पर पड़ सकता है।

ऊर्जा की लागत बढ़ने पर सरकारों के सामने ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने और महंगाई को संभालने की चुनौती भी बढ़ती है। सब्सिडी के जरिए कीमतों को कम रखने की कोशिश लंबे समय तक सरकारी वित्त पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।

महंगाई और ब्याज दरों पर भी नजर
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। यदि ईंधन और उत्पादन लागत लगातार बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंकों के लिए मौद्रिक नीति को संतुलित करना मुश्किल हो सकता है।

भारत में भी महंगाई की दिशा और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति आने वाले समय में नीतिगत फैसलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। ऊंची महंगाई की स्थिति में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने का दबाव बढ़ सकता है।

पूर्वी एशिया की अर्थव्यवस्था को भी फायदा
विश्व बैंक ने पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि का अनुमान भी बढ़ाया है। बैंक के मुताबिक इस क्षेत्र को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश और मजबूत निर्यात से फायदा मिल रहा है।

हालांकि, ऊर्जा संकट के लंबे समय तक बने रहने से इस सकारात्मक रफ्तार को झटका लग सकता है। इसके अलावा एआई क्षेत्र में निवेश की गति कम होना और मौसम संबंधी जोखिम भी क्षेत्रीय विकास के लिए चुनौती बन सकते हैं।

भारत के लिए आगे की राह
भारत की मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियां फिलहाल विकास को सहारा दे रही हैं। लेकिन वैश्विक ऊर्जा कीमतों, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव पर नजर रखना जरूरी होगा।

यदि ऊर्जा बाजार में अस्थिरता सीमित रहती है और घरेलू निवेश तथा खपत की रफ्तार बनी रहती है, तो भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए सकारात्मक माहौल कायम रह सकता है। दूसरी ओर, लंबे समय तक महंगी ऊर्जा और ऊंची महंगाई विकास की गति पर दबाव डाल सकती है।

TAGGED:Domestic DemandEconomic GrowthEnergy PricesGDP Growth ForecastGlobal EconomyIndia GDPIndian EconomyInflationRBIWorld Bank
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