लखनऊ। राजधानी लखनऊ में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए वृंदावन योजना में आधुनिक बस टर्मिनल विकसित किया जाएगा। रायबरेली रोड स्थित वृंदावन योजना के पी-4 पार्किंग क्षेत्र में बनने वाले इस टर्मिनल पर 265 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना का उद्देश्य शहर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए अतिरिक्त टर्मिनल उपलब्ध कराना और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करना है। प्रस्तावित बस टर्मिनल को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं का अनुभव मिल सके। इससे बसों के संचालन, पार्किंग और यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
7.06 एकड़ जमीन पर विकसित होगा टर्मिनल
वृंदावन योजना के पी-4 पार्किंग क्षेत्र में लगभग 7.06 एकड़ जमीन पर इस परियोजना का विकास किया जाएगा। नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के मुताबिक, वर्तमान में लखनऊ में दुबग्गा डिपो से 116 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है। इसके अतिरिक्त 300 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रक्रिया भी जारी है।
इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने के साथ उनके लिए पार्किंग, चार्जिंग और मरम्मत की सुविधाओं की आवश्यकता भी बढ़ेगी। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए नए बस टर्मिनल के निर्माण का निर्णय लिया गया है। परियोजना का क्रियान्वयन नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा किया जाएगा।
बस टर्मिनल और व्यावसायिक सुविधाओं पर खर्च होंगे 265 करोड़
परियोजना को डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण यानी डीबीएफओटी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत में 60 करोड़ रुपये बस टर्मिनल के निर्माण पर और 205 करोड़ रुपये व्यावसायिक सुविधाओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे। इस लागत में जमीन की कीमत शामिल नहीं है।
यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
प्रस्तावित टर्मिनल में बस-वे, बस पार्किंग, इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन, मरम्मत केंद्र, कर्मचारियों के विश्राम कक्ष, प्रशासनिक कार्यालय और सुरक्षा कक्ष बनाए जाएंगे। यात्रियों के लिए टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र, प्रतीक्षालय और सामान रखने की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
इसके अलावा परिसर में रेस्तरां, कॉफी शॉप, फास्ट फूड आउटलेट, व्यावसायिक दुकानें, मेडिकल स्टोर, बैंक, एटीएम, सार्वजनिक शौचालय, वाटर एटीएम, टैक्सी स्टैंड और सार्वजनिक पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अग्निशमन व्यवस्था भी परियोजना का हिस्सा होगी।
निर्माण के बाद निदेशालय को सौंपा जाएगा टर्मिनल
परियोजना के तहत विकासकर्ता को डिजाइन, ड्राइंग और स्पेसिफिकेशन की अंतिम मंजूरी नगरीय परिवहन निदेशालय से लेनी होगी। निर्माण पूरा होने के बाद बस टर्मिनल को निदेशालय को निशुल्क हस्तांतरित किया जाएगा।
निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, विकासकर्ता को बस टर्मिनल का रखरखाव 35 वर्ष तक और व्यावसायिक सुविधाओं से संबंधित बुनियादी ढांचे का रखरखाव 90 वर्ष तक करना होगा। इस परियोजना से लखनऊ में सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे को विस्तार मिलने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की उम्मीद है।