शेयर बाजार में गिरावट आने पर निवेशकों के मन में अक्सर सवाल उठता है कि क्या यह म्यूचुअल फंड में ज्यादा पैसा लगाने का सही समय है। अगर आपके पास अतिरिक्त बचत है, तो SIP की रकम बढ़ाने का विकल्प आकर्षक लग सकता है। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेश बढ़ाने का फैसला केवल बाजार की गिरावट देखकर नहीं, बल्कि अपनी आमदनी, खर्च और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए निवेशक हर महीने एक निश्चित रकम म्यूचुअल फंड में लगाते हैं। वहीं, स्टेप-अप SIP में हर साल निवेश की राशि को तय प्रतिशत से बढ़ाया जाता है। इससे आय बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ता है और लंबे समय में वित्तीय लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।
बाजार गिरने पर क्या SIP बढ़ाना फायदेमंद है?
जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, तो म्यूचुअल फंड की यूनिट्स अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल सकती हैं। उदाहरण के लिए, किसी फंड की एक यूनिट 100 रुपये की है, तो 10,000 रुपये में 100 यूनिट मिलेंगी। अगर उसकी कीमत घटकर 80 रुपये हो जाती है, तो इसी रकम से 125 यूनिट खरीदी जा सकती हैं।
हालांकि, कम कीमत पर ज्यादा यूनिट मिलने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में मुनाफा निश्चित है। बाजार में और गिरावट आ सकती है और निवेश के मूल्य में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए केवल बाजार का निचला स्तर पकड़ने की कोशिश में SIP की रकम बढ़ाना सही रणनीति नहीं मानी जाती।
फाइनेंशियल रेडियंस के संस्थापक और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर राजेश मिनोचा के मुताबिक, निवेश से जुड़े फैसले बाजार की दिशा का अनुमान लगाने के बजाय अपनी वित्तीय क्षमता के आधार पर लेने चाहिए।
वेतन बढ़ने पर बढ़ाएं निवेश
SIP में बढ़ोतरी का एक बेहतर आधार आपकी बढ़ती आय हो सकती है। वेतन में इजाफा, बोनस या किसी कर्ज की EMI खत्म होने से हर महीने अतिरिक्त रकम बचने लगे, तो उसका कुछ हिस्सा निवेश में लगाया जा सकता है।
मुंबई के म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर समीर नेसरीकर का सुझाव है कि निवेशकों को सालाना SIP बढ़ाने की आदत बनानी चाहिए। इससे आमदनी बढ़ने पर अतिरिक्त पैसा अनावश्यक खर्चों में जाने के बजाय भविष्य के लक्ष्यों के लिए निवेश किया जा सकता है।
SIP बढ़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
विट्टा मित्रा LLP के संस्थापक ऋषित शाह के अनुसार, निवेश बढ़ाने से पहले आपातकालीन जरूरतों के लिए पर्याप्त बचत रखना जरूरी है। अचानक नौकरी जाने, बीमारी या किसी अन्य परेशानी के समय यही रकम आर्थिक सहारा देती है।
इसके अलावा, निवेश की अवधि भी महत्वपूर्ण है। शेयर बाजार से जुड़े म्यूचुअल फंड में उसी पैसे को लगाने पर विचार करें, जिसकी निकट भविष्य में जरूरत न हो। पांच साल या उससे अधिक की अवधि का लक्ष्य रखने पर भी जोखिम खत्म नहीं होता, इसलिए फंड का चयन अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार करें।
हर साल कितनी बढ़ाएं SIP?
विशेषज्ञों के सुझाव के अनुसार, निवेशक अपनी आय में बढ़ोतरी के अनुरूप SIP को 5 से 10 फीसदी तक बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। अगर आमदनी और बचत में पर्याप्त इजाफा हुआ है, तो 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी भी संभव हो सकती है। हालांकि, यह कोई तय नियम नहीं है। जरूरी खर्चों और दूसरी वित्तीय जिम्मेदारियों को प्रभावित किए बिना ही निवेश बढ़ाना चाहिए।
लंबी अवधि में SIP की रकम में नियमित बढ़ोतरी निवेश को मजबूत बना सकती है। लेकिन अंतिम फैसला बाजार की गिरावट या संभावित रिटर्न के अनुमान पर नहीं, बल्कि आपकी बचत, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए।